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महाभारत 13.12.28
इन्द्रेण भेदितास्ते तु युद्धेऽन्योन्यमपातयन्तच्छ्रुत्वा तापसी चापि संतप्ता प्ररुरोद ह
indreṇa bheditāste tu yuddhe'nyonyamapātayantacchrutvā tāpasī cāpi saṃtaptā praruroda ha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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