महाभारत 13.121.11अल्पोऽपि तादृशो दायो भवत्युत महाफलःतृषिताय च यद्दत्तं हृदयेनानसूयताalpo'pi tādṛśo dāyo bhavatyuta mahāphalaḥtṛṣitāya ca yaddattaṃ hṛdayenānasūyatāइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें