महाभारत 13.121.5
तदन्नमुत्तमं भुक्त्वा गुणवत्सार्वकामिकम्प्रतिष्ठमानोऽस्मयत प्रीतः कृष्णो महामनाः
tadannamuttamaṃ bhuktvā guṇavatsārvakāmikampratiṣṭhamāno'smayata prītaḥ kṛṣṇo mahāmanāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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