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महाभारत 13.121.9
व्यास उवाच · vyāsa uvāca
अतिच्छेदातिवादाभ्यां स्मयोऽयं समुपागतःअसत्यं वेदवचनं कस्माद्वेदोऽनृतं वदेत्
aticchedātivādābhyāṃ smayo'yaṃ samupāgataḥasatyaṃ vedavacanaṃ kasmādvedo'nṛtaṃ vadet
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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