महाभारत 13.123.13
अकर्ता चैव कर्ता च लभते यस्य यादृशम्यद्येवोर्ध्वं यद्यवाक्च त्वं लोकमभियास्यसि
akartā caiva kartā ca labhate yasya yādṛśamyadyevordhvaṃ yadyavākca tvaṃ lokamabhiyāsyasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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