महाभारत 13.124.13
कार्यार्थे निर्गतं चापि भर्तारं गृहमागतम्आसनेनोपसंयोज्य पूजयामि समाहिता
kāryārthe nirgataṃ cāpi bhartāraṃ gṛhamāgatamāsanenopasaṃyojya pūjayāmi samāhitā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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