महाभारत 13.124.16
प्रवासं यदि मे भर्ता याति कार्येण केनचित्मङ्गलैर्बहुभिर्युक्ता भवामि नियता सदा
pravāsaṃ yadi me bhartā yāti kāryeṇa kenacitmaṅgalairbahubhiryuktā bhavāmi niyatā sadā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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