महाभारत 13.124.20इमं धर्मपथं नारी पालयन्ती समाहिताअरुन्धतीव नारीणां स्वर्गलोके महीयतेimaṃ dharmapathaṃ nārī pālayantī samāhitāarundhatīva nārīṇāṃ svargaloke mahīyateइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें