महाभारत 13.125.5
कश्चित्तु बुद्धिसंपन्नो ब्राह्मणो विजने वनेगृहीतः कृच्छ्रमापन्नो रक्षसा भक्षयिष्यता
kaścittu buddhisaṃpanno brāhmaṇo vijane vanegṛhītaḥ kṛcchramāpanno rakṣasā bhakṣayiṣyatā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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