महाभारत 13.126.2
त्वत्तो धर्मार्थसंयुक्तमायत्यां च सुखोदयम्आश्चर्यभूतं लोकस्य श्रोतुमिच्छाम्यरिंदम
tvatto dharmārthasaṃyuktamāyatyāṃ ca sukhodayamāścaryabhūtaṃ lokasya śrotumicchāmyariṃdama
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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