महाभारत 13.127.40
भगवन्सर्वभूतेश शूलपाणे महाव्रतसंशयो मे महाञ्जातस्तं मे व्याख्यातुमर्हसि
bhagavansarvabhūteśa śūlapāṇe mahāvratasaṃśayo me mahāñjātastaṃ me vyākhyātumarhasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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