महाभारत 13.128.36
भैक्षचर्यापरो धर्मो धर्मो नित्योपवासितानित्यस्वाध्यायिता धर्मो ब्रह्मचर्याश्रमस्तथा
bhaikṣacaryāparo dharmo dharmo nityopavāsitānityasvādhyāyitā dharmo brahmacaryāśramastathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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