महाभारत 13.129.2
महेश्वर उवाच · maheśvara uvāca
ब्राह्मणा लोकसारेण सृष्टा धात्रा गुणार्थिनालोकांस्तारयितुं कृत्स्नान्मर्त्येषु क्षितिदेवताः
brāhmaṇā lokasāreṇa sṛṣṭā dhātrā guṇārthinālokāṃstārayituṃ kṛtsnānmartyeṣu kṣitidevatāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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