महाभारत 13.130.3
तेषामपि विधिं पुण्यं श्रोतुमिच्छामि शंकरवानप्रस्थेषु देवेश स्वशरीरोपजीविषु
teṣāmapi vidhiṃ puṇyaṃ śrotumicchāmi śaṃkaravānaprastheṣu deveśa svaśarīropajīviṣu
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें