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महाभारत 13.132.25
न कोपाद्व्याहरन्ते ये वाचं हृदयदारणीम्सान्त्वं वदन्ति क्रुद्धापि ते नराः स्वर्गगामिनः
na kopādvyāharante ye vācaṃ hṛdayadāraṇīmsāntvaṃ vadanti kruddhāpi te narāḥ svargagāminaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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