महाभारत 13.132.27
उमोवाचमनसा बध्यते येन कर्मणा पुरुषः सदातन्मे ब्रूहि महाभाग देवदेव पिनाकधृक्
umovācamanasā badhyate yena karmaṇā puruṣaḥ sadātanme brūhi mahābhāga devadeva pinākadhṛk
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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