महाभारत 13.132.57
अथ चेन्मानुषे लोके कदाचिदुपपद्यतेतत्र दीर्घायुरुत्पन्नः स नरः सुखमेधते
atha cenmānuṣe loke kadācidupapadyatetatra dīrghāyurutpannaḥ sa naraḥ sukhamedhate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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