महाभारत 13.133.39
न रज्ज्वा न च दण्डेन न लोष्टैर्नायुधेन चउद्वेजयति भूतानि श्लक्ष्णकर्मा दयापरः
na rajjvā na ca daṇḍena na loṣṭairnāyudhena caudvejayati bhūtāni ślakṣṇakarmā dayāparaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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