महाभारत 13.134.36
पुत्रवक्त्रमिवाभीक्ष्णं भर्तुर्वदनमीक्षतेया साध्वी नियताचारा सा भवेद्धर्मचारिणी
putravaktramivābhīkṣṇaṃ bharturvadanamīkṣateyā sādhvī niyatācārā sā bhaveddharmacāriṇī
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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