महाभारत 13.135.137
सर्वागमानामाचारः प्रथमं परिकल्प्यतेआचारप्रभवो धर्मो धर्मस्य प्रभुरच्युतः
sarvāgamānāmācāraḥ prathamaṃ parikalpyateācāraprabhavo dharmo dharmasya prabhuracyutaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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