महाभारत 13.135.28
लोकाध्यक्षः सुराध्यक्षो धर्माध्यक्षः कृताकृतःचतुरात्मा चतुर्व्यूहश्चतुर्दंष्ट्रश्चतुर्भुजः
lokādhyakṣaḥ surādhyakṣo dharmādhyakṣaḥ kṛtākṛtaḥcaturātmā caturvyūhaścaturdaṃṣṭraścaturbhujaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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