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महाभारत 13.135.75
त्रिसामा सामगः साम निर्वाणं भेषजं भिषक्संन्यासकृच्छमः शान्तो निष्ठा शान्तिः परायणम्
trisāmā sāmagaḥ sāma nirvāṇaṃ bheṣajaṃ bhiṣaksaṃnyāsakṛcchamaḥ śānto niṣṭhā śāntiḥ parāyaṇam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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