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महाभारत 13.137.12
तद्वाक्यान्ते चान्तरिक्षे वागुवाचाशरीरिणीन त्वं मूढ विजानीषे ब्राह्मणं क्षत्रियाद्वरम्सहितो ब्राह्मणेनेह क्षत्रियो रक्षति प्रजाः
tadvākyānte cāntarikṣe vāguvācāśarīriṇīna tvaṃ mūḍha vijānīṣe brāhmaṇaṃ kṣatriyādvaramsahito brāhmaṇeneha kṣatriyo rakṣati prajāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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