महाभारत 13.137.17
सर्वभूतप्रधानांस्तान्भैक्षवृत्तीनहं सदाआत्मसंभावितान्विप्रान्स्थापयाम्यात्मनो वशे
sarvabhūtapradhānāṃstānbhaikṣavṛttīnahaṃ sadāātmasaṃbhāvitānviprānsthāpayāmyātmano vaśe
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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