महाभारत 13.137.24
तं राजा कस्त्वमित्याह ततस्तं प्राह मारुतःवायुर्वै देवदूतोऽस्मि हितं त्वां प्रब्रवीम्यहम्
taṃ rājā kastvamityāha tatastaṃ prāha mārutaḥvāyurvai devadūto'smi hitaṃ tvāṃ prabravīmyaham
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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