महाभारत 13.14.91
पाण्डुरेणातपत्रेण ध्रियमाणेन मूर्धनिसेव्यमानोऽप्सरोभिश्च दिव्यगन्धर्वनादितः
pāṇḍureṇātapatreṇa dhriyamāṇena mūrdhanisevyamāno'psarobhiśca divyagandharvanāditaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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