महाभारत 13.142.12
उपेत्य शकटैर्यान्ति न सेवन्ति रजस्वलाम्अभुक्तवत्सु नाश्नन्ति दिवा चैव न शेरते
upetya śakaṭairyānti na sevanti rajasvalāmabhuktavatsu nāśnanti divā caiva na śerate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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