महाभारत 13.142.2
मदस्यास्यमनुप्राप्ता यदा सेन्द्रा दिवौकसःतदेयं च्यवनेनेह हृता तेषां वसुंधरा
madasyāsyamanuprāptā yadā sendrā divaukasaḥtadeyaṃ cyavaneneha hṛtā teṣāṃ vasuṃdharā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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