महाभारत 13.151.16
सरयूर्गण्डकी चैव लोहित्यश्च महानदःताम्रारुणा वेत्रवती पर्णाशा गौतमी तथा
sarayūrgaṇḍakī caiva lohityaśca mahānadaḥtāmrāruṇā vetravatī parṇāśā gautamī tathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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