महाभारत 13.151.8
वालखिल्यास्तपःसिद्धाः कृष्णद्वैपायनस्तथानारदः पर्वतश्चैव विश्वावसुर्हहाहुहूः
vālakhilyāstapaḥsiddhāḥ kṛṣṇadvaipāyanastathānāradaḥ parvataścaiva viśvāvasurhahāhuhūḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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