महाभारत 13.153.17
ऋत्विग्भिर्ब्रह्मकल्पैश्च भ्रातृभिश्च सहाच्युतःआसाद्य शरतल्पस्थमृषिभिः परिवारितम्
ṛtvigbhirbrahmakalpaiśca bhrātṛbhiśca sahācyutaḥāsādya śaratalpasthamṛṣibhiḥ parivāritam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें