महाभारत 13.153.20
प्राप्तोऽस्मि समये राजन्नग्नीनादाय ते विभोआचार्या ब्राह्मणाश्चैव ऋत्विजो भ्रातरश्च मे
prāpto'smi samaye rājannagnīnādāya te vibhoācāryā brāhmaṇāścaiva ṛtvijo bhrātaraśca me
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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