महाभारत 13.153.2
सान्त्वयामास नारीश्च हतवीरा हतेश्वराःविपुलैरर्थदानैश्च तदा पाण्डुसुतो नृपः
sāntvayāmāsa nārīśca hatavīrā hateśvarāḥvipulairarthadānaiśca tadā pāṇḍusuto nṛpaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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