महाभारत 13.154.23
समेतं पार्थिवं क्षत्रं काशिपुर्यां स्वयंवरेविजित्यैकरथेनाजौ कन्यास्ता यो जहार ह
sametaṃ pārthivaṃ kṣatraṃ kāśipuryāṃ svayaṃvarevijityaikarathenājau kanyāstā yo jahāra ha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें