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महाभारत 13.154.24
यस्य नास्ति बले तुल्यः पृथिव्यामपि कश्चनहतं शिखण्डिना श्रुत्वा यन्न दीर्यति मे मनः
yasya nāsti bale tulyaḥ pṛthivyāmapi kaścanahataṃ śikhaṇḍinā śrutvā yanna dīryati me manaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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