महाभारत 13.16.47
एवं प्रजापतिः पूर्वमाराध्य बहुभिः स्तवैःवरयामास पुत्रत्वे नीललोहितसंज्ञितम्
evaṃ prajāpatiḥ pūrvamārādhya bahubhiḥ stavaiḥvarayāmāsa putratve nīlalohitasaṃjñitam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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