महाभारत 13.16.67
ब्रह्मा शतक्रतुर्विष्णुर्विश्वेदेवा महर्षयःन विदुस्त्वामिति ततस्तुष्टः प्रोवाच तं शिवः
brahmā śatakraturviṣṇurviśvedevā maharṣayaḥna vidustvāmiti tatastuṣṭaḥ provāca taṃ śivaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें