महाभारत 13.17.24ब्रह्मणामपि यद्ब्रह्म पराणामपि यत्परम्तेजसामपि यत्तेजस्तपसामपि यत्तपःbrahmaṇāmapi yadbrahma parāṇāmapi yatparamtejasāmapi yattejastapasāmapi yattapaḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें