महाभारत 13.17.46
त्रिजटश्चीरवासाश्च रुद्रः सेनापतिर्विभुःअहश्चरोऽथ नक्तं च तिग्ममन्युः सुवर्चसः
trijaṭaścīravāsāśca rudraḥ senāpatirvibhuḥahaścaro'tha naktaṃ ca tigmamanyuḥ suvarcasaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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