महाभारत 13.17.55उग्रतेजा महातेजा जयो विजयकालवित्ज्योतिषामयनं सिद्धिः संधिर्विग्रह एव चugratejā mahātejā jayo vijayakālavitjyotiṣāmayanaṃ siddhiḥ saṃdhirvigraha eva caइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें