महाभारत 13.17.64
मुख्योऽमुख्यश्च देहश्च देहर्द्धिः सर्वकामदःसर्वकालप्रसादश्च सुबलो बलरूपधृक्
mukhyo'mukhyaśca dehaśca deharddhiḥ sarvakāmadaḥsarvakālaprasādaśca subalo balarūpadhṛk
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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