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महाभारत 13.18.48
ब्रह्मा शक्रो मारुतो ब्रह्म सत्यं; वेदा यज्ञा दक्षिणा वेदवाहाःसोमो यष्टा यच्च हव्यं हविश्च; रक्षा दीक्षा नियमा ये च केचित्
brahmā śakro māruto brahma satyaṃ; vedā yajñā dakṣiṇā vedavāhāḥsomo yaṣṭā yacca havyaṃ haviśca; rakṣā dīkṣā niyamā ye ca kecit
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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