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महाभारत 13.19.23
ततो नीलं वनोद्देशं द्रक्ष्यसे मेघसंनिभम्रमणीयं मनोग्राहि तत्र द्रक्ष्यसि वै स्त्रियम्
tato nīlaṃ vanoddeśaṃ drakṣyase meghasaṃnibhamramaṇīyaṃ manogrāhi tatra drakṣyasi vai striyam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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