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महाभारत 13.2.21
तामग्निश्चकमे साक्षाद्राजकन्यां सुदर्शनाम्भूत्वा च ब्राह्मणः साक्षाद्वरयामास तं नृपम्
tāmagniścakame sākṣādrājakanyāṃ sudarśanāmbhūtvā ca brāhmaṇaḥ sākṣādvarayāmāsa taṃ nṛpam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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