महाभारत 13.2.22
दरिद्रश्चासवर्णश्च ममायमिति पार्थिवःन दित्सति सुतां तस्मै तां विप्राय सुदर्शनाम्
daridraścāsavarṇaśca mamāyamiti pārthivaḥna ditsati sutāṃ tasmai tāṃ viprāya sudarśanām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें