महाभारत 13.2.27
तान्दर्शयामास तदा भगवान्हव्यवाहनःस्वं रूपं दीप्तिमत्कृत्वा शरदर्कसमद्युतिः
tāndarśayāmāsa tadā bhagavānhavyavāhanaḥsvaṃ rūpaṃ dīptimatkṛtvā śaradarkasamadyutiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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