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महाभारत 13.2.30
ततः स राजा तच्छ्रुत्वा वचनं ब्रह्मवादिनाम्अवाप्य परमं हर्षं तथेति प्राह बुद्धिमान्
tataḥ sa rājā tacchrutvā vacanaṃ brahmavādināmavāpya paramaṃ harṣaṃ tatheti prāha buddhimān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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