महाभारत 13.2.32
ततः सांनिध्यमध्यापि माहिष्मत्यां विभावसोःदृष्टं हि सहदेवेन दिशो विजयता तदा
tataḥ sāṃnidhyamadhyāpi māhiṣmatyāṃ vibhāvasoḥdṛṣṭaṃ hi sahadevena diśo vijayatā tadā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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