महाभारत 13.2.34
प्रतिजग्राह चाग्निस्तां राजपुत्रीं सुदर्शनाम्विधिना वेददृष्टेन वसोर्धारामिवाध्वरे
pratijagrāha cāgnistāṃ rājaputrīṃ sudarśanāmvidhinā vedadṛṣṭena vasordhārāmivādhvare
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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