महाभारत 13.2.38
तामोघवान्ददौ तस्मै स्वयमोघवतीं सुताम्सुदर्शनाय विदुषे भार्यार्थे देवरूपिणीम्
tāmoghavāndadau tasmai svayamoghavatīṃ sutāmsudarśanāya viduṣe bhāryārthe devarūpiṇīm
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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